लेबनानी संसद में परिवर्तन व सुधार धड़े के प्रमुख मीशल औन ने कल कहा कि इस्राईल के मुक़ाबले में लेबनान का भविष्य प्रतिरोध के साथ सुनिश्चित होगा। मीशल औन ने वर्ष 2006 में इस्राईल के विरुद्ध 33 दिवसीय युद्ध में प्रतिरोध की विजय की पांचवी वर्षगांठ पर बधाई देते हुए कहा कि लेबनान का भविष्य इस्राईल की अतिग्रहणकारी नीतियों के मुक़ाबले में प्रतिरोध की दृढ़ता पर निर्भर है। मीशल औन ने कहा कि हम केवल प्रतिरोध द्वारा और उसका समर्थन कर अपने देश को बचा सकते हैं। मीशल औन ने कहा कि वर्ष 2006 से इस्राईल का पतन आरंभ हो गया है। इस्राईल ने 12 जुलाई 2006 को लेबनान के विरुद्ध व्यापक युद्ध आरंभ किया किन्तु लेबनान के जनप्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के जियालों की वीरता के सामने इस्राईल पीछे हटने पर विवश हुआ और उसे भारी क्षति पहुंची। लेबनान के खेल व युवा मामलों के मंत्री फ़ैसल केरामी ने दक्षिणी लेबनान के कुछ क्षेत्रों के निरीक्षण के पश्चात इस बात का उल्लेख करते हुए कि प्रतिरोध ने शत्रु के हाथों से अतिग्रहित ज़मीन को स्वतंत्र कराया कहा कि प्रतिरोध से नए समीकरण अस्तित्व में आए हैं जो लेबनान के उज्जलव भविष्य को दर्शाता है। 33 दिवसीय युद्ध में लेबनान के जनप्रतिरोध के सामने इस्राईल की पराजय, वास्तव में इस्राईल की दूसरी पराजय है। इस पराजय ने लेबनान के बड़े भाग के अतिग्रहण तथा इस देश के विभाजन के इस्राईल के षड्यंत्र को विफल बना दिया और इस षड्यंत्र की आड़ में अमरीका की ग्रेटर मिडिलईस्ट की योजना कि जिसका आरंभिक बिन्दु लेबनान था, व्यवहारिक रूप से विफल हो गयी। इन उपलब्धियों ने यह दर्शा दिया कि प्रतिरोध ही लेबनान की शक्ति का रहस्य है। यही कारण है कि लेबनान के राजनेता व बड़ी हस्तियां अमरीका के दबावों के बावजूद, इस्राईल के अतिक्रमण के सामने प्रतिरोध को बाक़ी रखने पर बल दे रहे हैं।(एरिब डाट आई आर के धन्यवाद के साथ).....166